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पाजीटिव एनर्जी से भरपूर शाहरूख खान और उनका दफ्तर

Posted On: 22 Jan, 2010 मस्ती मालगाड़ी में

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फिल्‍म पत्रकारिता में ऐसे दिन कम मिलते हैं। पिछले बुधवार 20 जनवरी को संयोग ऐसा बना कि पहले अमिताभ बच्‍चन और फिर शाहरुख खान के इंटरव्‍यू का सुयोग बना। हिंदी फिल्‍मों के लोकप्रिय स्‍टारों से मिलना हमेशा सुखद रहता है। हम पत्रकारों को यह सुविधा मिलती रहती है कि हम कभी अकेले तो कभी भीड़ में उनसे बातें करते रहें। उनकी बातें आप तक पहुंचाते रहें। इस प्रक्रिया में केवल जरूरी बातें ही छप पाती हैं। बाकी हमारे अनुभव का हिस्‍सा बन जाती हैं। सभी कहते हैं कि मैं उन अनुभवों के बारे में लिखूं, लेकिन नौकरी करते हुए सभी खट्टे-मीठे अनुभव लिख पाना नामुमकिन है। कोई बात उन्‍हें नागवार गुजरी तो प्रोफेशनल नुकसान हो जाएगा। अब आप इसे ईमानदारी से खिसकना मानें तो आप की मर्जी।
बहरहाल, आज की चर्चा शाहरुख के लिए। बांद्रा के बैंड स्‍टैंड पर खड़ा उनका आलीशान बंगला मन्‍नत उनके स्‍टारडम की गवाही देता है। ऊंची चहारदीवारी और ऊंचे गेट के पीछे अपने किंग खान रहते हैं। किंग खान के किंगडम में पूरी दुनिया समा चुकी है। शाहरुख के प्रशंसक दुनिया के हर कोने में हैं। खास कर जर्मनी में तो कुछ ज्‍यादा ही हैं। वे भावुक हैं। वे शाहरुख खान की फिल्‍में देख कर रोते हैं, क्‍योंकि वे राहुल की तकलीफ को बगैर शब्‍दों और संवाद के भी समझ लेते हैं। शाहरुख को मैं दंभी मानता हूं। यह उनका गुण है। इसे आप सकारात्‍मक गुण मानें। बहुत कम ऐसे स्‍टार हैं, जो अपना प्रभाव जानते हैं और उसे स्‍वीकार करते हैं। स्‍वाभिमानी शाहरुख का आत्‍म‍बल स्‍ट्रांग है। वे इसे अपने मिडिल क्‍लास बैकग्राउंड की देन मानते हैं। उन्‍हें इस बात का गर्व है कि साधारण पृष्‍ठभूमि से निकलने पर भी अपनी मेहनत से वे इस मुकाम तक पहुंचे हैं। गौर करें तो खान त्रयी के बाकी दोनों खान फिल्‍म इंडस्‍ट्री के हैं।
उस दोपहर मैं निश्चित समय पर उनके दफ्तर पहुंच गया था। मन्‍नत के पिछले हिस्‍से में उन्‍होंने दफ्तर बना रखा है। उसी के सेकेंड फ्लोर पर गेट से मुझे भेजा गया। वहां पहुंचने पर मालूम हुआ कि कुछ पत्रकारों से वे घिरे बैठे हैं और पिछले एक घंटे से उनके हर सवाल के जवाब दे रहे हैं। सभी ने उनके साथ तस्‍वीरें भी खिंचवाईं। मुझे बताया गया कि थोड़ा वक्‍त लगेगा, क्‍योंकि तीन और इंटरव्‍यू लाइन अप हैं। वे टीवी के इंटरव्‍यू हैं। उनमें से एक कोयल पुरी का भी इंटरव्‍यू था।
शाहरुख का दफ्तर खुला और लंबा-चौड़ा है। आम तौर पर हिंदी फिल्‍मों की हस्‍तियों के दफ्तर में एक किस्‍म की घुटन महसूस होती है, जो बंद माहौल और एसी की वजह से ज्‍यादा ठंडी और मारक लगती है। शाहरुख खान का खुद का दफ्तर और बाकी कमरे भी खुशगवार लगते हैं। एक पॉजीटिव एनर्जी है उनके ऑफिस में। एक तो सारे स्‍टाफ प्रसन्‍नचित्त और चौकस नजर आते हैं। दूसरे शायद उन्‍हें ऐसा निर्देश दिया गया है कि आगंतुकों से बेजा सवाल न पूछे जाएं और न उन्‍हें यह एहसास होने दिया जाए कि वे जिस से मिलने आए हैं, उससे कमतर हैं। ऐसा न लगे कि वे जबरन आ गए हैं। माफ करें, ज्‍यादातर फिल्‍मी हस्तियां आप के अंदर एहसास-ए-कमतरी भरने में कोई कसर नहीं छोड़तीं।
शाहरुख शाम में खाली हुए और मेरा इंटरव्‍यू आरंभ ही होने वाला था कि गौरी दिखीं। गौरी उनकी पत्‍नी हैं और जैसी तस्‍वीरों में आप उन्‍हें देखते रहे हैं, उनसे बिल्‍कुल भिन्‍न मुद्रा और ड्रेस में। उन्‍होंने ट्रैक शूट का पजामा और टी शर्ट पहन रखा था। कोई मेकअप नहीं, कोई एक्‍सेसरी नहीं। मुझे बताया गया कि शाहरुख ने दिन का खाना मिस किया है। अगर आप इजाजत दें तो वे खाकर आ जाएं। गौरी उन्‍हें बुलाने आई हैं। मेरी तरफ से शाहरुख की से‍हत के लिए यह खयाल रखना लाजिमी थी और फिर यहां तो गौरी भी थीं। सचमुच, कितने सुखी हैं शाहरुख। शाहरुख ने जाने के पहले खुद भी बताना जरूरी समझा और लगभग अनुमति लेने की मुद्रा में पूछा, ‘मैं खाकर आ जाऊं?’ वे आराम से कह सकते थे या किसी से कहलवा सकते थे कि आप वेट करो, वे खाने गए हैं। छोटी बातों में ही व्‍यक्ति का बड़प्‍पन दिखता है।

वे जब लौट कर आए और बातें शुरू हुईं तो ‘माय नेम इज खान’ पर हम तुरंत नहीं पहुंचे। मुंबई की ट्रैफिक, रोज की दिक्‍कतें और कई गैरजरूरी बातें… इन सभी बातों में शामिल शाहरुख खान एक आम नागरिक की तरह अपनी तकलीफें और आब्‍जर्वेशन शेयर कर रहे थे। फिर तो वे लगातार बोलते गए। मैं बता दूं कि शाहरुख खान हिंदी फिल्‍म इंडस्‍ट्री के उन चंद स्‍टारों में से एक हैं, जिनकी बातें रोचक होती हैं। वे या तो बात नहीं करते और अगर करते हैं तो ऐसा लगता है कि कुछ छिपाने की कोशिश नहीं करते। हमारी बातचीत लंबी से और लंबी होती गयी। साढ़े आठ बजे हमने बतियाना शुरू किया था। दस बज गए तो फिर गौरी आ गई। उन्‍होंने धीरे से दरवाजा सरकाया और पूछा, ‘और कितनी देर?’ शाहरुख ने ही जवाब दिया दस-पंद्रह मिनट…
दस-पंद्रह मिनट से ज्‍यादा हो गया तो सुहाना आ धमकी। ओह हो… सुहाना की एंट्री और उसका ड्रामा… उस पर फिर कभी…



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7 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Javed Hussain के द्वारा
February 14, 2010

Shahrukh u r great. mein sabse yahi kehna chahta hoon ki Shahrukh Khan ne INDIA ka naam kitna roshan kiya hai yeh har indian janta hai phir bhi unse kaha jaye ki tum deshdrohi ho or deshprem ka saboot do, toh isse yahi pata chalta hai ki muslims ke saath har baat mein bhedbhav kiya ja raha hai.

Sanjeet N Mishra के द्वारा
January 23, 2010

अच्छा आदमी वही बनता है, जो सच में अच्छा होता है. किंग खान जमीन से जुड़े लोग हैं, उन्होंने जो कुछ भी पाया है अपने बलबूते पाया है….. ! अब जब अछे लोगों से बातें होंगी, तो अछि बातें निकलेंगी…….. बहुत धन्यवाद………..!

upendrapandey के द्वारा
January 23, 2010

शाहरुख खान इस मुकाम तक कैसे पहुंचे अौर उनके बचपन की बातें भी होतीं तो ज्यादा अच्छा लगता। बहरहाल अच्छा है।-

विनीत कुमार के द्वारा
January 22, 2010

संस्मरण को पढ़कर लगा कि कहीं न कहीं हम भी मौजूद थे। शायद आपके साथ,आपके सवालों या शब्दों के साथ या फिर एक ऐसे शख्स की तरह जो पहले से कई सारे एजेम्पशन्स को लेकर जीता और मिलने के बाद कुछ और महसूस करता है।.

brahmatmaj के द्वारा
January 22, 2010

शाहरूख खान समेत सभी सितारों‍ की मेहनत और इंसानियत तारीफ के काबिल है। हम उन्‍हें एंवै ही लेते हैं। आज समाज में उन सभी की उपयोगिता बढ़ गई है। समाज उन्‍हें बदले में क्‍या देता है ?

priya के द्वारा
January 22, 2010

शाहरुख खान को अभिनय की दुनिया का बादशाह माना जा सकता है. लेकिन आपका अनुभव यह कहता है कि वे लोगों का भी ख़याल रखते है जो उनके व्यक्तित्व को और भी निखार देता है.

vats के द्वारा
January 22, 2010

ब्रह्मात्मज भाई साहब , फ़िल्मी दुनिया से जीवंत साक्षात्कार कराने का शुक्रिया. सबसे रोचक है आपका व्यक्तिगत अनुभव जो वाकई मजेदार है.


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