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शाहरूख बनाम शिव सेना : आप किधर हैं ?

Posted On: 4 Feb, 2010 मस्ती मालगाड़ी में

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शाहरूख खान अभी अमेरिका और इंग्‍लैंड की यात्रा पर हैं। वे अपनी फिल्‍म माय नेम इज खान के प्रचार के लिए वहां गए है। उनके एक बयान पर शिवसैनिक भड़के हुए हैं। उन्‍होंने चेतावनी दे रखी है कि वे सिनेमाघरों में माय नेम इज खान नहीं चलने देंगे। उनकी इस धमकी से सभी घबराए हुए हैं।अगर मुंबई में फिल्‍म रिलीज नहीं हो पाई तो भारी नुकसान होगा।उस आर्थिक नुकसान से ज्‍यादा बड़ा खतरा शिवसेना का रवैया है। हालांकि महाराष्‍ट्र सरकार ने भरोसा दिलाया है कि माय नेम इज खान अवश्‍य रिलीज होगी,लेकिन उस भरोसे पर फिल्‍म इंडस्‍ट्री को यकीन नहीं हो रहा है। फिल्‍म इंडस्‍ट्री लामबंद नहीं है।इस मुद्दे पर आप क्‍या योचते हैं? मुझे लगता है कि हम सभी को अपनी राय रखनी चाहिए। मुझे शिवसेना का रवैया अनुचित और असंवैधानिक लगता है। आप भी अपनी राय लिखें।



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36 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

UTTAM KUMAR के द्वारा
February 18, 2010

शिव सेना ठीक है क्यू की पाकिस्तान हमारा पडोसी कम और दुश्मन ज्यादा है वो देख ही नहीं सकता की भारत तरकी करे वहा के क्रिक्केटर और फिल्म एक्टर और उम्मर शरीफ भारत की कितनी बुरे करते है पाकिस्तान १ आतंकवादी देश है वो हमारी कभी भी हमारी तरकी नहीं देख सकता आज शिव सेना की बुरे करने वाले नहीं जानते के जिस किसी घर का कोई बंदा जब आतंकवाद की भेट चदता है तो उस के साथ उसका परिवार भी उसकी भेट चढ़ जाता है मे बिलकुल शिव सेना के साथ हु की बाला साहब ठाकरे जैसे लोग इस देश मे है

    brahmatmaj के द्वारा
    February 23, 2010

    और क्‍या हम पड़ोसी और दोस्‍त की भूमिका निभाते हैं ?

Avadhesh Kumar Gupta के द्वारा
February 14, 2010

Shahrukh and Thakre are working on same line and lenghth. After all Thakre’s act is good ad for Shah’s film and paying very good in return for media and market by making a non issue as issue and thus changing the track of common people’s thinking.

    vikas rohtagi के द्वारा
    February 14, 2010

    Avdesh ji seems you are right in saying so ,i also feel both the icons joined hands to make the film a great success.No hindu /muslim we shall always be used,misused & abused.

Parveen Sundriyal के द्वारा
February 12, 2010

मेरा मानना है की शाहरुख अब राजनीती में आना चाहता है. कांग्रेस मे उसने सेटिंग कर ली है अब वो अपनी मुस्लिम जड़ो को उभारना चाहता है ताकि उसको मुस्लिम चेहरे के तौर पर आगे ला सके. ठाकरे एक सुपारी वाला गुंडा है जिसे इन्द्रा गाँधी ने खड़ा किया था और आपातकाल में उसने गुणगान किया था.दोनों आपस में एक दुसरे को कोस कर अपना राजनितिक भविष्य बढाना चाहते है. पिछले कुछ समय से शाहरुख की फिल्मे तो चल नहीं रही अब वो दूसरी लाइन खोज रहा है. जनता इन टोटको से सावधान रहे.

Anand Madhab के द्वारा
February 10, 2010

सब कुर्सी का खेल है? इसमें मीडिया की भी भूमिका है, मेरी राय मानें तो aise netaon ko aur aisi baton ko media main koi sthan nahin milna chahiye. hum hi hain jo bawal machwatein hai aur aag main ghi dalne ka kam kartein hain.

    brahmatmaj के द्वारा
    February 17, 2010

    बिल्‍कुल सही कह रहे हैं सर। मीडिया इस्‍तेमाल में है,कभी मर्जी से तो कभी अर्जी से।

navneet tripathi gorakhpur के द्वारा
February 9, 2010

chacha-bhatije mil kar mumbai ki hi nahi eis des ka bantadhar kare me lage huye hye. ayese logo ke samne stta pratishthan bhi jab ghutne tek de to bhagvan hi malik hye. loktantra ki aar lekar gundo ka sangthan chalane valo ko kanun ke dayre me lana jaruri hye.eiske liye chahe jitna kathor kadm uthana pare.

MANOJ KUMAR YADAV के द्वारा
February 9, 2010

RAJ THAKRE OR BALA SAHEB KO PAKISTAN BHEJ DENA CHAHIYE. KYOKI A-SHE LOGO KE LIYE PAKISTHAN HI SAHI JAGAH HAI INDIA ME KATTARTA KE LIYE KOI JAGAH NAHI HAI.MUMBAI PURE HINDUSTAN KI HAI NA KI THAKKRE JASE LOGO KI.

MANOJ KUMAR YADAV के द्वारा
February 9, 2010

SHIV SENA EK GUNDA PARTY HAI.VO APNI PHITRAT KE MUTABIK KAAM KAR RAHE HAI.AAJ KENDER SARKAR KO CHAHIYE KI ASHI GANDI PARTY SE SAKTI KE NIPTE.

ajay brahmatmaj के द्वारा
February 9, 2010

सचमुच ऐसा लगता है कि शिवसेना आखिरी उबाल पर है। पार्टी को चर्चा में रखने के लिए ही ऐसे भड़काऊ बयान दिए जाते हैं। और जब लगता है कि कुछ कर नहीं सकते या मुश्किलें होंगी तो बयान बदल देते हैं। यह गीदढ़भभकी ही है।

http://gharibadmi.blogspot.com/ के द्वारा
February 8, 2010

एकता में अनेकता का घड़ा गरम तवे पर उलट दिया गया है. सभी नेता अपनी अपनी रोटी सेंक रहे हैं . अपनी अपनी भाजी के साथ खा पी रहे हैं. अपन साइड में बैठ के भूख के मरे कुलबुला रहे हैं. बड़े बड़े हाथी लड़ते हों तो आइड साइड में कहीं दुबक लेना चाहिए. पता नहीं किसके पैर के नीचे आ जाएँ . हाथी का क्या जायेगा अपनी तो दुच्ली बन जायगी एक मिनट में.

ak anthony के द्वारा
February 7, 2010

ye sale shiv shainikon ne to sab ka jina hram kar diya hai kya ye maharashtra inke baap ka hai. are bhiya ji he hi sale sab se bde atankwadi hai. inko hi mahaarastra se nikal kar bihar bhej do sab thik ho jayega kyu ki bihar me lalu ji sab samhaal lenge. are btaiye itna paisa lga kar film bnayi jati hai aur ye kehte hai ki chalne nhi denge are kasie chalne nhi denge kya ye inke baap ka paisa hai jo chalne nhi denge. chaliye thik agar kuch jyada boldiya to– to kya– bol diya to bol diya ab dekh lenge.

satyendrasingh के द्वारा
February 7, 2010

I am with India, And Indian cosntitution hustfy shahrukh Khan, Shivsena is following antinational agenda , So I condemn Shivsena’s stand. Moreover i feel that it may be fix match between shivsena and SRK to popularise the movie. nothing is impossible in todays world.I have seen sop called religious leader sitting in a closed room , making a planning how to rule and rule over masses. They say somethimgelse in media, and totally different thing in their personal talks. They devide only people for their political or buisiness games and all are unitted internally. But as per costitution of India shivsena is playing a filthy game , which cant be tollerated by the people who want to see a unitted progressive nation. So me is with SRK

Mahabir Singh Rajput के द्वारा
February 6, 2010

इन दोनों ठाकरे परिवार को देश से निकल कर अफ्गानिश्तन में भेज देना चाहिएय क्योनी वहा लादेन की पोस्ट अभी खाली हैं

Rajkumar Singh के द्वारा
February 6, 2010

कोई सफा न देखा दिल का सांचा बना झिलमिल का रे कोई सफा न देखा दिल का काजी देखा मुल्ला देखा पंडित देखा छलका औरो को बैकुंठ बतावे आप नरक में सरका बिल्ली देखा बगुला देखा सर्प जो देखा बिल का ऊपर ऊपर बना सफेदी भीतर गोला जहर का पढ़े लिखे कुछ वेद साश्त्र भरा गुमान बरन का कहत कबीर सुनो भाई साधो लानत एसे तन का

Rajkumar Singh के द्वारा
February 6, 2010

हिंदुत्व क्या हैं ? गीता के आरम्भ में ही अर्जुन ने कहा गोविन्द मै युद्ध नहीं करूगा क्योकि कुल धर्मं सनातन है जातिध्र्र्माह कुल्धर्र्मस्च सास्व्ताह यह जाती धर्मं और कुल धर्मं ही सास्वत है युद्ध जनित नरसंघार से पिन्दोदक क्रिया लुप्त हो जाएगी पितर लोग गिर जायेंगे वर्णसंकर हो जायेंगे इत्यादि हमलोग समझदार होकर भी पाप करने को उद्दत हुए है सस्त्रधारी कौरव मुझ शस्त्र विहीन को मार डाले तो मरना श्रेयस्कर है गोविन्द मैं युद्ध नहीं करूगा यह पाप हैं एक धार्मिक भ्रान्ति ने अर्जुन को मौत के मुह में धकेल दिया गीता के बिश्म्रित होने का दुष्परिणाम था की अनेक भ्रान्तिया फैल गई जिनमे से एक भ्रान्ति का अनुयायी अर्जुन भी था इसपे भगवान कृष्ण ने कहा अर्जुन तुझे यह अज्ञान कहा से उत्पन्न हो गया यह न कीर्ति करने वाला है न कल्याण करने वाला है

Ajay Kumar Rao के द्वारा
February 6, 2010

Similarity and Differences between Thakre Family and Militants Similarity : – Both are killing human Both are destroying peace Both are working for their profit Differences :- Thakre Family uses their Mouths Militants uses their Guns

Rajkumar Singh के द्वारा
February 6, 2010

राहुल गाँधी का मुंबई दौरा हुआ इसको पूरा भारत देखा नहीं देखा तो सिर्फ ठाकरे का परिवार राहुल गाँधी जैसा जज्बा सभी नेताओ के पास हो जाये तो फिर युआ भारत को विकसित भारत बनाने में समय नहीं लगेगा जो नेता अलगाव वाद का नारा देते हैं उनके लिए तो सिर्फ इतना ही कहूगा की जहा सुमति तह सम्पति नाना जहा कुमति तह बिपति निधाना

Avinash wahi के द्वारा
February 5, 2010

i m always with SRK bcoz i knw he dont say wrong about our country he also feel he is indian. than how can indian do wrong with indians thats my point of you And i feel he does’nt feel guilt to say sorry to anyone. bcoz he is a true person

Rajkumar Singh के द्वारा
February 5, 2010

सारूख खान जी के बारे में जो भी हो रहा हैं वो गैर संबैधानिक है और इसके पीछे कोंग्रेस और बीजेपी बराबर जिम्मेदार हैं हमने बचपन में सुना था की अगर एक अंगुली काट देने से हाथ बचता है परिवार के एक सदस्य के त्याग देने से परिवार बचता हैं एक घर त्याग देने से एक गाँव बचता हैं तो एक पार्टी त्याग देने से एक प्रदेश और एक राष्ट्र क्यों नहीं बचा रहे हैं ये राजनेता क्या यह कहावत और कानून सिर्फ आम आदमी के लिए हैं

Atul के द्वारा
February 5, 2010

सर नमस्कार, आज ही -क्योंकि उनको आपकी जरूरत है- शीर्षक से शाहरुख संबंधी छोटा सा लेख अपने ब्लॉग चौराहा पर लगाया है. पढ़ेंगे तो खुशी होगी औऱ साथ ही आपके प्रश्न का उत्तर भी मिलेगा कि हम किस ओर हैं.. अतुल तहलका

ravikant के द्वारा
February 5, 2010

interesting

DR. ANWER JAMAL के द्वारा
February 4, 2010

दुखकी बात है कि आज आदमी न तो आतंकवादियों से महफूज़ है; न राष्ट्रवादियों से और न ही क्ष्ेात्रवादियों से ।

M. Yunus के द्वारा
February 4, 2010

सर आपके इस लेख पर में समझता हूँ के हर भारतीय की एक ही राये होगी और वो ये के हमें शिव सेना जेसे संगठन की किसी भी बात को तवज्जो नहीं देनी चाहिए क्योकि ये सिर्फ और सिर्फ दूसरो को अपनी और आकर्षित करने का तरीका और न्यूज़ में बने रहने का तरीका होता हे अगर हम इनकी तरफ ध्यान नहीं देगे तो ये लोग अपने आप ह ख़तम हो जाएगे

Anand Rai, Jagran के द्वारा
February 4, 2010

कुछ लोगों का जलवा सिर्फ गीदड भभकी से बन जाता है। पर जब आमने-सामने के मौके आते हैं तो पोल खुल जाती है। यूपी बिहार के लोग तो उनकी धमकी सुन सुन कर पक गये हैं। अब सिनेमा के लोगों को भी निशाने पर ले रहे हैं। जाहिर है कि उम्र के इस पडाव पर उनका दिमाग साथ नहीं दे रहा है। उन्‍हें शांति की जरूरत है। पर शांति के लिए उनकी उम्र के लोग चारो धाम की यात्रा करते हैं। बाला साहब को किसी ने सलाह भी नहीं दी और वे अपना इलाका छोडकर कहीं बाहर जाते भी नहीं हैं। एक बार भारत घूम लें तो अपने आप सबसे प्‍यार हो जायेगा। भारतीय सभ्‍यता उन्‍हें समझ में आ जायेगी। अतिथि देवो भव उनके जेहन में आ जायेगा।

Ashok Vyas के द्वारा
February 4, 2010

अब एसा लाहने लगा है की शिव सेना (श्रीमान ठाकरे परिवार) तालिबानिय जेसी ताकत पाना चाहते है. कौन क्या पड़ेगा? कौन कहाँ रहेगा? कौन टेक्सी चलाएगा? आदी अगर वे मराठियों का सचमुच भला चाहते है तो महारास्ट्र के हर तहसील में एक एक चिकित्सालय और एक एक विद्यालय खोले और साबित करे की वे सचमुच किसी के हितेषी है. में समझता हु बाबा आमटे माथेर टेर्रेसा ये साबित किया है

Ashok Vyas के द्वारा
February 4, 2010

हिंदुस्तान किसी की भी बपौती नहीं है. किस हिन्दुस्तानी को कहाँ रहना चाहिए या कहाँ नहीं रहना चाहिए इसका निर्णय कोई राजनेता नहीं कर सकता. ऐसा व्यक्ति तो कदापि नहीं जो कानूनन मताधिकार का प्रयोग के लिए प्रतिबंधित हो. राजनेतायों के लिए ये सब सत्ता पाने का हथियार हो सकता है लेकिन इससे देश एकता, अखंडता, और संप्रभुता खतरे में पद सकती है. हमें तय करना होगा की आखिर हम क्या चाहते है. आज सरदार पटेल की कमी सबसे ज्यादा महसूस हो रही है.

Ram Kumar Pandey के द्वारा
February 4, 2010

भाई साहब , खुद ख़त्म हो जाएंगे यह बुलबुले. इन्हें इनके हाल पर छोड़ देना उचित है. बस हमारी कोशिश यह हो कि हमारे किसी प्रयास से इनके कृत्यों को महत्व ना मिलने पाए. सच कहूं तो विघटनकारी तत्व केवल और केवल देशद्रोही , जनद्रोही, समाजद्रोही, व्यक्ति द्रोही होते हैं. इन्हें कूड़ा समझकर भूल जाना चाहिए नहीं तो अपनी राजनीति चमकाने के प्रयास में खंड-खंड कर डालेंगे देश को यह सिरफिरे और शातिर लोग.

मनीष के द्वारा
February 4, 2010

ब्रह्मतज जी, आज जो हो रहा है उसमें अगर शिवसेना शाहरुख खान को गलत मानती है तो शिवसेना उससे भी बडी जिम्मेदार है. शिव सेना हर बात पर जो किसी को भी धमकी दे देती है वह अब फिजुल का बनता जा रहा हैं. शाहरुख ने आज जो बयां दिया वह यह दर्शाता है कि वह भावनात्मक तरीके से आहत है. उन्होंने कहा कि ” मै दुखी हूं और अगर मुझे किसी को सॉरी कहना हुआ तो अपने बच्चों को कहुंगा” . सही बात है वह एक आदर्श कलाकार के साथ आदर्श पिता भी है, जो कभी अपने बच्चों को पडोसियों से लडता नही देखना चाहते. मैं उनका समर्थन करता हूं कि वह शिवसेना से माफी न मांगे बल्कि शिवसेना को उनसे माफी मांगनी चाहिए.

सुरेश चिपलूनकर के द्वारा
February 4, 2010

मैं, मराठी-अमराठी मुद्दे पर दोनों मूर्ख ठाकरों के विरोध में… लेकिन पाकिस्तानी खिलाड़ी मुद्दे पर शाहरुख के विरोध में…

brahmatmaj के द्वारा
February 4, 2010

अगर हमलोग आज के मुद्दे पर बात करें तो ज्‍यादा उपयोगी विमर्श होगा। किसी धमकी की प्रतिक्रिया धौंस नहीं हो सकती।शिव सेना के आह्वानों और शाहरूख खान के बयानों पर बात हो।

मनीष के द्वारा
February 4, 2010

शिव सेना का रवैया आजकल देश्द्रोहियों की तरह लगने लगा है.वह अपनी गरेबान में झांक कर नही देखते हैं कि वर्ष 2004 में उन्होने अपने घर मॆं जावेद मियादाद को भोजन करवाया था आखिर तब उनका देशप्रेम क्या घास चरने गया था. राज ठाकरे मुबंई हमलो के दौरान कहां छुपे पडे थे. क्या जो सिपाही मुंबई हमलों के दौरान मारे गये थे वह सभी मराठी थे? आखिर किस आधार पर शिवसेना और मनसे सचिन, शाहरुख, आमिर जैसी हस्तियों को गैर-भारतीय बताते हैं.

safat alam के द्वारा
February 4, 2010

यह शिवसेनकों की दादागिरी है। धाँधली है। अत्याचार है। भारत एक लोकतंत्र देश है । वह चाहते हैं कि भारत के लोग शान्तिपूर्ण जीवन न बिताएं। रहने दो बहुत हो गया। जियो और जीने दो। हमारा भारत महान

    arpan के द्वारा
    February 15, 2010

    i dont understand why the govt. is not taking any proper steps towards this kind of sensitive issue.other states may follow the same procedure and become the threat for the country


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