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शाहरुख खान के समर्थन में हैं दर्शक और यह एक प्रकार का विरोध है

Posted On: 12 Feb, 2010 मस्ती मालगाड़ी में

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‘माय नेम इज खान’ का मसला फिल्‍म के नफा-नुकसान से बड़ा है। फिल्‍म के मुख्‍य किरदार रिजवान खान को उसकी बीवी मंदिरा ने भावावेश में कह दिया है कि किस-किस को समझाते रहोगे कि मुसलमान होने के बावजूद तुम टेररिस्‍ट नहीं हो। जाओ, अमेरिका के राष्‍ट्रपति को जाकर बताओ कि ‘माय नेम इज खान एंड आय एम नाट अ टेररिस्‍ट’। फिल्‍म का केंद्रीय संवाद फिलहाल इस फिल्‍म और शाहरुख खान के लिए प्रासंगिक हो गया है। मुंबई में शिवसेना की जिद है कि शाहरुख आईपीएल में पाकिस्‍तानी क्रिकेटरों के शामिल करने के बयान को वापस लें। शाहरुख खान को लगता है और सही ही लगता है कि उन्‍होंने कोई गलत बात नहीं कही है, इसलिए उसे वापस लेने या माफी मांगने की जरूरत नहीं है। शाहरुख खान ट्विटर के जरिए पूरी दुनिया से संपर्क बनाए हुए हैं और 180 अक्षरों में अपनी मनोदशा और भावना व्‍यक्‍त कर रहे हैं।

हमेशा की तरह नपुंसक फिल्‍म इंडस्‍ट्री खामोश है। सभी के मुंह पर ताले लग गए हैं। महेश भट्ट जैसी कुछ अपवाद हस्तियां शाहरुख खान के समर्थन में दिख रही हैं। वे आज पिफल्‍म देखने गण्‍ और अपना स्‍टैंड सार्वजनिक किश। यह अजीब सी जंग है, जिसमें लड़ना कोई नहीं चाहता, लेकिन जीत की चाहत सभी रखते हैं। अकेले में या ऑफ रिकार्ड बात करो तो सभी शिवसेना की धौंस से दुखी सुनाई पड़ते हैं। फिर भी कोई अपनी बात या विरोध दर्ज नहीं कराना चाहता। कला और मनोरंजन के क्षेत्र की यह विडंबना है कि अभिव्‍यक्ति की आजादी की चाहत सुरक्षित सुविधाओं के बीच ही की जाती है। डंडा दिखे तो अभिव्‍यक्ति की चिंता खौफ के खोह में घुस जाती है।

‘माय नेम इज खान’ फिल्‍म कैसी बनी है? अभी किसी भी समीक्षा या विमर्श से अधिक महत्‍वपूर्ण इस फिल्‍म के विवाद के परिणाम और प्रभाव हैं। फिल्‍म का मूल भाव पर्दे से निकलकर सिनेमाघरों के बाहर आ गया है। यह भाव बाहर आकर दर्शकों को ललकार रहा है। रिजवान खान सिर्फ फिल्‍मी पात्र नहीं रह गया है। वह हमारे समय की जिंदा हकीकत के तौर पर हमें हैरान कर रहा है। दबाव, दमन और उत्‍पीड़न के खिलाफ हमेशा एक लहर सी उठती है। आरंभ में ऐसे सामूहिक अकुलाहट का कोई अगुआ नहीं होता, लेकिन समय और विरोध के साथ इस सोच को एक विचार मिलता है और फिर नेतृत्‍व भी निकल आता है। सिर्फ मुंबई में ही नहीं,बल्कि पूरे देश में लोग फिल्‍म देखने के लिए टूट पड़े हैं। फिल्‍म से अधिक उनकी रुचि विरोध में है। वे शाहरूख के समर्थन में सिनेमाघर के बाहर कतार में खड़े हैं।

अपने समाज में फिल्‍म महज मनोरंजन का माध्‍यम बना लिया गया है। इस बार ‘माय नेम इज खान’ मनोरंजन की हद से निकल आई है। यह हमें आलोड़ित कर रही है। शाहरुख खान के अटूट स्‍वाभिमान से दर्शक जुड़ाव महसूस कर रहे हैं। फिल्‍म के प्रति समर्थन की हवा है। साफ दिख रहा है कि दोराहे पर खड़ी शिवसेना और महाराष्‍ट्र सरकार के ढुलमुल रवैए को समझते हुए दर्शक लामबंद हो रहे हैं। इस माहौल में भी कुछ लोग और फिल्‍मों के ट्रेड पंडित नफा-नुकसान के संदर्भ में ही सोच रहे हैं। करण जौहर की फिल्‍म ‘माय नेम इज खान’ परिस्थितियों के कारण इतनी बड़ी हो गई है कि अब सिनेमाघरों का पर्दा छोटा पड़ रहा है। यह हमारे समय के समाज और संवेदना को झकझोर रही है। करण का यह लक्ष्‍य नहीं रहा होगा, लेकिन ऐसा हो गया है।
बर्लिन में आज शाम ‘माय नेम इज खान’ कि टिकट 1000 यूरो (लगभीग 60,000 रूपए) में बिके और फिल्‍म हाउसफुल रही।
और एक बात-प्‍लीज किसी मल्‍टीप्‍लेक्‍स में फिल्‍म देख रहे हों और बोर भी हो रहे हों तो पांव न हिलाएं। पड़ोसी सीट पर बैठा मैं परेशान हो जाता हूं और फिल्‍म से मेरा ध्‍यान बंट जाता है।



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8 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

rahul के द्वारा
February 27, 2010

My name is Khan And Here Is My List Of Terrorist Attacks in India The massacres perpetrated by Muslims in India are unparalleled in history. They are bigger in sheer numbers than the Holocaust, or the massacre of the Armenians by the Turks; more extensive even than the slaughter of the South American native populations by the invading Spanish and Portuguese. Major recent attacks by Islamic terrorists in India: March 12, 1993: 257 killed and more than 1,000 injured in 15 co-ordinated bomb attacks in Bombay. The blasts were orchestrated by an Islamic group headed by Dawood Ibrahim. February 14, 1998: 46 people were killed and more than 200 injured in 13 car bombs in the city of Coimbatore, Tamil Nadu. The attacks were blamed on the “Al Umma” Islamist group October 1, 2001: Militants belonging to Jaish-e-Mohammed, a Kashmiri group, attacked Jammu and Kashmir Assembly complex in Srinagar, killing 35 people. December 13, 2001: Attack on the Indian Parliament complex in New Delhi led to the killing of a dozen people and 18 injured. Four members of the Pakistan-based Islamist group Jaish-e-Mohammed were later convicted for their part in the plot September 24, 2002: 31 people killed, 79 wounded at Akshardham temple in Gujarat May 14, 2002: Islamic attackers killed more than 30 people in an Army camp near Jammu. March 13, 2003: A bomb attack on a commuter train in Mumbai killed 11. Aug. 25, 2003: Twin car bombings in Mumbai killed at least 52 people and injured 150. Indian authorities blamed the Kashmiri Islamist group Lashkar-e-Taiba July 5, 2005: Attack on the Ram Janmabhoomi complex, the site of the destroyed Babri Mosque at Ayodhya in Uttar Pradesh. Oct. 29, 2005: Three explosions in busy shopping areas of south Delhi, two days before the Hindu festival of Diwali, killed 59 and injured 200. Islami Inqilabi Mahaz (Islamic Revolutionary Group) claimed responsibility, but authorities blamed Lashkar-e-Taiba March 7, 2006: A series of bombings in the holy city of Varanasi killed at least 28 and injured over a hundred. Indian investigators blamed Pakistan-based Islamic terrorists. July 11, 2006: Seven bomb blasts on the Mumbai Suburban Railway killed over 200 people. Police blamed Lashkar-e-Taiba and Students Islamic Movement of India. Sept. 8, 2006: At least 37 people were killed and 125 were injured in a series of explosions near a mosque in Malegaon, Maharashtra. The Islamic Movement of India claimed responsibility. Aug. 25, 2007: Forty-two people killed and 50 injured in twin explosions at a crowded park in Hyderabad by Harkat-ul-Jehad-i-Islami (HuJI). May 13, 2008: A series of six explosions in Jaipur killed 63 people and injured more than 150. July 26, 2008: Serial explosions in the western Indian city of Ahmedabad killed 45 people and injured more than 150. The Indian Mujahideen claimed responsibility

Sumat Kumar के द्वारा
February 15, 2010

Yaaro aapko ek baat batata hoon ye Sharukh bahut hi minded hai ye apni film ko superhit karane ke liye kuch na kuch hathkande apna hi leta hai becharin emotional janta uske vahkave main aa hi jati hai/ hai na

ramesh के द्वारा
February 13, 2010

एकदम बेकार फिल्म है, लेकिन ठाकरे को सबक सिखाने के लिये हम सभी को इसे अवश्य देखना चाहिये..

    brahmatmaj के द्वारा
    February 13, 2010

    बिल्‍कुल सही कहा है रमेश जी ने।ठाकरे को सबक सिखाने केलिए ही दर्शक इसे देख रहे हैं। उनके लिए फिल्‍म का मर्म महत्‍वपूर्ण नहीं है।

Parveen Sundriyal के द्वारा
February 13, 2010

दो पैसे की फिल्म नहीं है और बर्लिन में १००० यूरो की टिकेट खरीदने वाले कौन लोग है जरा पता तो चले कही वो तो नहीं जो कई एअरपोर्ट पर पकडे जा चुके है.

राकेश सिंह के द्वारा
February 13, 2010

मैं भी गया था कल इस फिल्म को देखने, कोई विरोध करने नहीं बल्कि इसकी इतनी ज्यादा हायप बनादी गई थी कि चला गया… कोई संवेदना फंवेदना नहीं थी.. लेकिन एकदम भौंडी फिल्म निकली, न ढंग के संवाद, न एक्टिंग, न गीत, संगीत का तो नाम भी न लीजिये, बस लोकेशन और फोटोग्राफी भव्य थी. जब फिल्म में कोई मनोरंजन ही नहीं, था एकदम बोर थी तो इस पर मनोरंजन कर क्यों लगाया गया था? अब आदमी बोर होगा तो पैर तो हिलाएगा ही, कल तो मैंने भी बहुत पैर हिलाये थे.

गिरिजेश राव के द्वारा
February 12, 2010

सब पब्लिसिटी स्टण्ट है। बहुत गहरा खेल है।

    संजय बेंगाणी के द्वारा
    February 13, 2010

    सुना है 40-45% ही ऑपनिंग मिली, वो भी इतनी हाय तौबा के बाद!


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