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आमिर बनाम शाहरुख

Posted On: 15 Feb, 2010 मस्ती मालगाड़ी में

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हिंदी फिल्‍मों की लोकप्रियता और बिजनेश का सही आकलन सोमवार के बाद ही होता है। सप्‍ताहांत के तीन दिन तो फिल्‍म आक्रामक प्रचार और दर्शकों को सिनेमाघरों में ठेलने की जोर-जबरदस्‍ती से चलती हैं। पिछले कुछ समय से निर्माता और वितरक पहले दिन और सप्‍ताहांत के आंकड़े देकर दर्शकों को आक्रांत करने लगे हैं। उनके मन में यह भ्रांति बिठाई जाती है कि फिल्‍म हिट हो चुकी है या हो रही है। जिन दर्शकों ने फिल्‍म फिल्‍म नहीं देखी होती है, उन पर मनोवैज्ञा‍निक असर होता है और वे सिनेमाघरों में इस दबाव के तहत घुसने लगते हैं। कई फिल्‍मों ने एक से तीन दिनों के अंदर सुपरहिट होने का दावा कर दर्शकों पर मनोवैज्ञानिक दबाव डाला है।
‘माय नेम इज खान’ अपनी खूबी और विवाद के कारण दर्शकों की ताजा पसंद बन गई है। शिवसेना और शाहरुख खान के विवाद ने फिल्‍म को बहुत चर्चित किया। यह फिल्‍म थिएटर के अंदर और बाहर दोनों जगहों पर चली। रविवार के बाद आज सोमवार से यह फिल्‍म थिएटरों में सीमित हुई है। फिल्‍म की लोकप्रियता का सही अनुमान आज के बाद ही चलेगा। वैसे, इस फिल्‍म को ऐसी मिली है कि सिनेमाघरों में आ रहे दर्शकों की रफ्तार थमते-थमते थमेगी। ‘माय नेम इज खान’ ने पहले दिन ही ग्‍लोबल स्‍तर पर 25 करोड़ रुपयों से अधिक का व्‍यापार कर लिया है। ‘माय नेम इज खान’ के लिए यह बड़ी छलांग है, क्‍योंकि दिसंबर में रिलीज हुई ‘3 इडियट’ के रिकार्ड कलेक्‍शन के बाद ऐसा प्रोजेक्‍ट किया जा रहा था कि आमिर खान की फिल्‍म का रिकार्ड टूटने में समय लगेगा। ‘माय नेम इज खान’ के कलेक्‍शन की यही गति रही तो यह फिल्‍म नए रिकार्ड स्‍थापित करेगी। हिंदी फिल्‍म इंडस्‍ट्री के लिए यह सुखद और उत्‍साहवर्द्धक बात होगी।

ब्रांड और मार्केटिंग के विशेषज्ञ और रणनीतिकार अब ‘माय नेम इज खान’ के कलेक्‍शन को शाहरुख खान की लोकप्रियता से जोड़ने की मुहिम में लगे हैं। जैसे ‘3 इडियट’ की रिलीज के बाद उसके ताजा कलेक्‍शन में शाहरुख खान की फिल्‍मों के कलेक्‍शन का उल्‍लेख किया जा रहा था, वैसे ही अब ‘माय नेम इज खान’ के कलेक्‍शन की ताजा रिपोर्ट में ‘3 इडियट’ के पिछड़ने की बात की जा रही है। फिल्‍म बाजार के कुछ पंडित इसे आमिर खान बनाम शाहरुख खान के ब्रांड से जोड़ रहे हैं।
मेरी नजर में आमिर खान और शाहरुख खान की अपनी विशेषताएं हैं। दोनों में श्रेष्‍ठ कौन है? यह सवाल अधिक मायने नहीं रखता। हमें यह देखना चाहिए कि दोनों अपनी फिल्‍मों से दर्शकों की जरूरतें पूरी कर रहे हैं या नहीं? हम उनकी फिल्‍मों का मूल्‍यांकन करें और फिर उनके व्‍यक्तित्‍व और योगदान को रेखांकित करें।
आप सभी में से कुछ आमिर खान के तो कुछ शाहरुख खान के प्रशंसक और समर्थक होंगे। आप उनमें क्‍या गुण देखते हैं और उनके योगदान को किस रूप में आंकते हैं?



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6 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

navneet sharma के द्वारा
February 16, 2010

अजय जी का एक और अच्‍छा आलेख। शाहरुख हों या आमिर…दोनों ज़हीन अभिनेता हैं। सरफरोश वाले आमिर को कोई नहीं भुलाना चाहेगा तो वीर जारा के स्‍कवाड्रन लीडर वीर प्रताप सिंह की आंखों और चेहरे पर जिंदगी के हरे साल पीले पड़ने का गम शाहरुख ही झलका सकते थे। इधर, अमोल गुप्‍ते के किरदार को तारे ज़मीं पर में निभाना आमिर के ही वश की बात थी। कल हो न हो में कैंसर से जूझ रहे युवक ने जिस प्रकार प्रेमिका के दिल को चुपचाप दोस्‍त के दिल में डाल दिया वह शाहरुख ही कर सकते थे। देवदास की पीड़ा को शाहरुख ने बाखूबी निभाया। गज़नी में आमिर का अलग ही रूप है तो ओम शांति ओम में शाहरुख भी अलग हैं। दोनों बहुत ही प्रतिभावान हैं लेकिन आमिर के पास एक सामाजिक प्रतिबद्धता है जो शाहरुख के यहां कुछ कम दिखती है।पैसे लेकर लोगों की शादियों में नाचने की बात सुनी थी। हो सकता है यह सही होता हो लेकिन एक प्रशंसक के नाते अच्‍छा नहीं लगा था। दूसरी ओर आमिर एक सोच लेकर चलते प्रतीत होते हैं सिनेमा के जरिये भी वहीं संदेश देते हैं। अच्‍छी बात यह है दोनों तटस्‍थ नहीं हैं। दोनों का कोई न कोई पक्ष है। दोनों की कई फिल्‍में दर्शक की जरूरत को पूरा कर रही हैं। आज के युग का सार्थक सिनेमा जो होना चाहिए वह इन दोनों के पास है। शाहरुख के पास मनोरंजन अधिक है तो आमिर के पास मनोरंजन के साथ-साथ संदेश भी।

    brahmatmaj के द्वारा
    February 16, 2010

    आप से असहमत होने की गुंजाइश नहीं दिखती।

ajaykumarjha1973 के द्वारा
February 16, 2010

अजय भाई , आज हिंदी फ़िल्मजगत में इन दोनों अभिनेताओं ने अपनी फ़िल्म और सोच से बौलीवुड को जो दिशा और शोहरत , न सिर्फ़ देश बल्कि विश्व सिनेजगत में भी, दी है , उनका ये योगदान युगों तक याद रखा जा सकता है ,बहुत बढिया लेख है ,

विवेक के द्वारा
February 15, 2010

दोनों ही हिंदी फिल्म जगत के चमकते सितारे हैं और दोनों ने ही हिंदी फिल्म जगत को कई अच्छी फिल्में दी हैं.

    brahmatmaj के द्वारा
    February 16, 2010

    विवेक और मनोज दोनों ही सम्‍यक दृष्टिकोण लेकर चल रहे हैं। आमिर और शाहरूख की श्रेष्‍ठ फिल्‍मों का भी उल्‍लेख होना चाहिए। उनके बाक्‍स आफिस कलेक्‍शन की तुलना ट्रेड पंडित करते ही रहेंगे। हम तो उनकी फिल्‍मों का आनंद लें।

Manoj के द्वारा
February 15, 2010

ब्र्हमात्ज जी, आमिर-शाहरुख दोनों ही हिंदी फिल्म जगत के माला-रुपी संसार के दो फुल है. दोनों में अपनी खुबियां और कमियां है, मसलन जहां आमिर हर फिल्म के लिए प्रफेक्शन को पहले रखते है तो शाहरुख फिल्म के रोल में खुद को डःालने की मात्र कोशिश करते है. आमिर जहां साल में एक दो फिल्मों से ज्यादा किसी में नजर नहीं आते तो शाहरुख सिर्फ अपने दोस्तों या यश राज की फिल्मों में ही आते है.पर एक बात साफ है कि दोनों ने ही हिंदी फिल्म जगत को ककई उचाईयां प्रदान की है.


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